है साया तेरे इश्क़ का ,
धुंधला सा गया उसके आने से ,
था इश्क़ का समुन्द्र ,
जैसे हो गया अब मछली बिन पानी के !
धुंधला सा गया उसके आने से ,
था इश्क़ का समुन्द्र ,
जैसे हो गया अब मछली बिन पानी के !
दिए जो जखम हैं तूने , तो जी लेते हैं हम , दर्द से अच्छा कोई , मरहम नहीं मेरा , थोड़ा रो देते है हम , थोड़ा पी लेते है हम , तेरे बिना जी...
No comments:
Post a Comment